Ethiclogy

जानिए आखिर क्यों झपकती हैं मनुष्य की पलकें ?



              

देवी पुराण के अनुसार- रघुवंश में राजा इक्ष्वाकु के पुत्र और मनु के पौत्र राजा निमि हुए। जिन्होंने वैजयन्त नामक नगर बसाया था, और इस नगर को बसकर उन्होंने एक बड़े यज्ञ का अनुष्ठान किया। जिसके लिए उन्होंने गुरु वशिष्ठ को आमंत्रित किया ,परन्तु वशिष्ठ जी को इन्द्रदेव ने पहले ही एक यज्ञ के लिए बुला लिया था। इसलिए वह राजा निमि से प्रतीक्षा करने को कहकर इन्द्रलोक चले गये। वशिष्ठ जी के चले जाने के बाद उन्होंने ऋषि गौतम को अपना आचार्य बनाया और यज्ञ में दीक्षित हो गये। राजा ने उन्हें बहुत सी दान दक्षिणा देकर विदा कर दिया। उधर इंद्रदेव का यज्ञ समाप्त होने पर वशिष्ठ जी राजा निमि का यज्ञ देखने के विचार से वहाँ गये, और वहाँ जाकर देखा यज्ञ में कोई नही था , और उस समय राजा निमि भी सोये हुए थे जिस कारण वे उनसे मिल नही पाए, तो वशिष्ठ जी ने सोचा की राजा मेरा अपमान कर रहा हैं । जिससे उन्होंने क्रोध में आकर राजा को श्राप दिया कि –जिसप्रकार तुमने मुझे छोड़कर दुसरे को गुरु बना लिया है, मेरा अपमान किया है अत; आज से तुम्हारा शरीर प्राणहीन होकर गिर जायेगा। मुनि का श्राप सुनकर सेवकों ने राजा को जगाया, वे तुरंत उनके समक्ष आ गये, और बोले गुरुदेव मैंने जानकर यह सब नही किया है परन्तु फिर भी आपने मुझे श्राप दिया। अत; में भी आपको श्राप देता हूँ कि आपका भी यह शरीर नष्ट हो जाये। इस प्रकार श्राप के कारण दोनों ही प्राणरहित हो गये। इसके बाद वशिष्ठ जी ने ब्रह्माजी से अपना शरीर पाने का रास्ता पूछा तब उन्होंने कहा कि तुम मित्र और वरुण के छोड़ हुए वीर्य में प्रविष्ट हो जाओ और समय आने पर वह मित्रावरुण नाम से प्रकट हुए। उधर राजा निमि के शरीर के नष्ट हो जाने पर ऋषियों ने स्वयं यज्ञ पूरा किया और अनेक मन्त्रो का प्रयोग कर उनकर शरीर को सुरक्षित कर रख लिया था। और उनकी आत्मा से उसका मनोरथ पूछा , तब राजा ने माता जगदम्बा की आराधना की और उनसे वर माँगा कि माता मैं सदा के लिए जन्म और मृत्यु के बंधन से मुक्त होकर, जिससे सभी प्राणी देखते हैं उसी में रहना चाहता हूँ अत; सभी प्राणियों के नेत्रों में रहना चाहता हूँ। माता ने राजा की इच्छा पूर्ण की और कहा कि राजा तुम सदा के लिए जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त होकर समस्त प्राणियों के नेत्रों में निवास करोगे, और तुम्हारे प्रभाव से ही आँखों में पलक झपकने की शक्ति रहेगी। परन्तु देवता इससे मुक्त रहेंगे, तभी से मनुष्य की पलक झपकने की क्रिया शुरू हुई ।