Ethiclogy

उत्तराखंड में स्थित पंच -बद्री मंदिर जिन्हें बहुत कम लोग ही जानते हैं |



              

जिस प्रकार उत्तराखंड में पंचकेदार मंदिर स्थित हैं ठीक उसी प्रकार पंचबद्री मंदिर स्थित हैं जिनके बिना बद्रीनाथ धाम की यात्रा सम्पूर्ण नहीं मानी जाती हैं बद्रीनाथ धाम के आलावा इन चार मंदिरों के बारे में हर एक व्यक्ति को होता हैं अतः आज हम आपको इन पंचबद्रीनाथ मंदिरों के बारे में बताएंगे - बद्रीनाथ मंदिर - यह मंदिर नर और नारायण पर्वतों के बीच और नीलकंठ पर्वत श्रंखलाओं के सामने समुद्र तल से 3133 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं यह मंदिर भगवान विष्णु के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक हैं जिसे प्रमुख चार धाम यात्रा में एक माना गया है | इस मंदिर का निर्माण आदिगुरु शंकराचार्य ने आठवीं शताब्दी में कराया था | मंदिर में विष्णु जी की मूर्ति शालिग्राम शिला से बनी हुई ,चतुर्भुज ध्यान मुद्रा में स्थापित हैं | आदिबद्री मंदिर - यह मंदिर कर्णप्रयाग -रानीखेत मार्ग पर स्थित हैं यह तीर्थ स्थल 16 मंदिरों का समूह हैं जिसका प्रमुख मंदिर विष्णु मंदिर हैं इन मंदिरों के सामने से एक जलधारा प्रवाहित होती हैं जिसे उत्तर वाहिनी गंगा भी कहा जाता हैं | योग-ध्यान बद्री मंदिर - जोशीमठ से 20 कि.मी. दूर और 1920 मीटर की ऊंचाई पर पांडुकेश्वर नामक स्थान पर स्थित हैं तृतीय योग-बद्री मंदिर | पांडवों द्वारा निर्मित इस मंदिर में कमल -पुष्प पर आसीन भगवान विष्णु की मूर्ति ध्यान- मुद्रा में स्थित हैं | भविष्य -बद्री मंदिर - जोशीमठ से 17 किलोमीटर की दूरी पर एक गांव सुभाई में स्थित हैं | यह मंदिर समुद्र तल से 2744 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं | यह मंदिर घने जंगलों के बीच स्थित हैं और वहाँ तक केवल ट्रेकिंग मार्ग से ही जाया जा सकता हैं | यह मंदिर कैलाश मानसरोवर पर्वत के एक प्राचीन मार्ग पर स्थित हैं | पौराणिक कथा के अनुसार जब कलयुग के अंत में नर और नारायण पर्वत आपस में मिल जायेंगे तब बद्रीनाथ मंदिर का रास्ता अवरुद्ध हो जायेगा| तब भगवान बद्री के दर्शन इसी भविष्य बद्रीधाम में ही होंगे | और यहीं उनकी पूजा की जाएगी। इसलिए इस मंदिर को भविष्य बद्रीधाम कहते हैं। यहाँ भगवान नरसिंह की भी पूजा की जाती हैं। वृद्ध- बद्री मंदिर - यह मंदिर समुद्र तल से 1380 मी. की ऊंचाई पर स्थित हैं। इस मंदिर में भगवान मूर्ति एक बूढ़े व्यक्ति के रूप में हैं इसलिए इन्हे वृद्ध बद्री कहते हैं। मान्यता हैं कि नारद जी ने विष्णु जी को प्रसन्न लिए यहां कठोर तपस्या थी जिसके फलस्वरूप विष्णु जी ने उन्हें बूढ़े व्यक्ति के रूप में दर्शन दिए थे ,तभी से उनकी यहां उनकी मूर्ति इसी रूप में हैं। यह मंदिर साल भर खुला रहता हैं। वैसे इन मंदिरों के आलावा दो मंदिर और हैं जिनके साथ होने से यह मंदिर पंच से सप्त बद्री मंदिर हो जाते हैं। जिनके बारे में आगे फिर जानकारी देंगे |