Ethiclogy

शनि पर्वत, मुरैना- हनुमान जी ने लंका से फेंका तो यहां गिरे शनिदेव



              

प्राचीन ग्रंथों में उल्लेख है कि कई दूसरे देवताओं के साथ रावण ने शनिदेव को भी कैद कर रखा था। जब हनुमान जी लंका जलाने की जुगत में थे तो शनि देव ने इशारा कर आग्रह किया कि उन्हें आजाद कर दें तो रावण का नाश करने में मददगार होंगे। बजरंगबली ने शनिदेव को रावण की कैद से छुड़ाया तो उस वक्त दुर्बल हो चुके शनिदेव ने उनसे दोबारा ताकत पाने के लिए सुरक्षित स्थान दिलाने का अनुरोध किया। हनुमान जी ने उन्हें लंका से प्रक्षेपित किया तो शनिदेव इस क्षेत्र में आकर प्रतिष्ठित हो गए। तब से यह क्षेत्र शनिक्षेत्र के नाम से विख्यात हो गया। देश भर से श्रद्धालु न्याय के देवता से इंसाफ की गुहार लगाने हर शनिश्चरी अमावस्या को यहां आते हैं। कहा जाता है कि लंका से प्रस्थान करते हुए शनिदेव की तिरछी नजरों के वार ने न सिर्फ सोने की लंका को हनुमान जी के द्वारा खाक में मिलवा दिया, साथ ही रावण का कुल के साथ विनाश करा कर शनि न्याय को प्रतिस्थापित किया।