Ethiclogy

सांपों की जीभ बीच में से कटी क्यों होती हैं ?



              

पुराणों के अनुसार साँपों की माँ कदु ने गरुड़ की माँ विनता को छल से अपनी दासी बना लिया। सभी साँपों ने गरुड़ के सामने यह शर्त रखी कि अगर वह स्वर्ग से उनके लिए अमृत लेकर आएगा तो उसकी माँ को दासता से मुक्त कर दिया जायेगा। यह सुनकर गरुण ने स्वर्ग पर आक्रमण कर दिया और सभी को परास्त कर दिया, युद्ध में स्वर्ग के देवता इन्द्र को उसने मारकर मुर्छित कर दिया। और जब अमृत लेकर गरुड़ वापस धरती पर आ रहा था तभी इंद्रा ने उसपर अपने वज्र से प्रहार कर दिया। परन्तु गरुड़ को अमरता का वरदान मिला था इसलिए उसपर वज्र के प्रहार का कोई असर नहीं हुआ। इंद्र ने गरुड़ से कहा कि यह अमृत कलश स्वर्ग का हैं इसलिए इसे स्वर्ग में रहने दो. इंद्र की बात सुनकर गरुड़ ने कहा इस अमृत को देकर वह अपनी माँ को दासता से मुक्त कराना चाहता है, लेकिन मैं इस अमृत को जहाँ रख दूंगा आप वहाँ से उठा लीजियेगा। गरुड़ की यह बात सुनकर इंद्र बहुत प्रसन्न हुए और कलश ले जाने की आज्ञा दे दी. कलश मिलने पर सभी साँपों ने मिलकर विचार किया कि पहले स्नान करने चलते हैं। दूसरी तरफ इंद्र वही घात लगाकर बैठे हुए थे जैसे ही वह सभी चले जाते हैं वह अमृत कलश लेकर स्वर्ग भाग जाते हैं। नहीं जब सांप वापस आते हैं तो उन्हें वहां कलश नहीं मिलता हैं फिर वह सोचते हैं कि अमृत इसी कुश के आसन पर रखा हुआ था तो हो सकता है इसपर अमृत की कुछ बूंदे गिरी हो। सभी कुश को अपनी जीभ से चाटने लगते हैं और उनकी जीभ बीच से दो भागों में कट जाती है। तभी से सभी साँपों की जीभ कटी हुई है। कुश एक प्रकार की घास होती है जिसका किनारा धारदार होता है इसी वजह से उनकी जीभ कट गयी.तभी से माना जाता है कि कुश हिन्दू धर्म के लिए बहुत पवित्र हो गया है और किसी भी पूजा के समय कुश का उपयोग किया जाता है।