Ethiclogy

विवाह में स्त्री को पुरुष के बाएं भाग में क्यों बिठाया जाता है ?



              

शास्त्रों के अनुसार पत्नी पति का शरीर ही है और उसके आधे भाग को अर्धांगिनी के रूप में पूरा करती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार पुरुष का जन्म ब्रह्मा के दहिने कंधे से और स्त्री का जन्म बाएँ कंधे से हुआ है, इसलिए स्त्री को वामांगी कहते है। विवाह के बाद स्त्री को पुरुष के वाम भाग में प्रतिष्ठित किया जाता है। सैट फेरे होने तक वधु को दाहिनी ओर बिठाया जाता है, क्योकि वह उस समय तक एक दुसरे व्यक्ति की तरह होती है परन्तु जब वह प्रतिज्ञाबद्ध होकर आत्मीय रूप से पत्नी बन जाती है तब उसे बाई ओर बैठाया जाता है। इस प्रकार बाई ओर आने पर वह अपने पति के साथ गृहस्थ-जीवन की सूत्रधार बन जाती है इस प्रक्रिया को शास्त्र में आसन-परिवर्तन के नाम से जाना जाता है। विवाह के बाद से पूजा आदि धार्मिक कार्यो में पत्नी हमेशा पति के बाएं भाग में ही बैठती है।