Ethiclogy

पारद शिवलिंग और शालिग्राम पूजा का विशेष महत्व क्यों है ?



              

पारद(पारा शम्भू-बीज है अर्थात् पारद की उत्पत्ति शंकरजी के वीर्य से हुई मानी जाती है इसलिए शास्त्रकारों ने इसे साक्षात् शिव माना है। पारद को शुद्ध करके विशेष प्रक्रियाओं द्वारा ठोस रूप देकर शिवलिंग का निर्माण किया जाता है, और देवी देवताओ की प्रतीमा भी बनाई जाती है जो स्वयं सिद्ध होती है। घर में पारद शिवलिंग सौभाग्य,शांति,स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए अधिक महत्वपूर्ण है पारद शिवलिंग का दर्शन महापुण्यवान है। इसके दर्शन से सैकड़ों अश्वमेध यज्ञों का फल प्राप्त होता है. जिस घर में पारद शिवलिंग का नियमित पूजन होता है वहाँ सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है, और वहाँ का वास्तुदोष समाप्त हो जाता है। शालिग्राम नेपाल में गंडकी नदी के तल में पाए जाने वाले काले रंग के चिकने अंडाकार पत्थर,जिनमे एक छिद्र होता है और पत्थर के अंदर शंख,चक्र,गदा या पदम् खुदे होते है और कुछ पत्थरों पर सफेद रंग की गोल चक्र के समान धारियां बनी होती है उनको शालिग्राम कहा जाता है। शालिग्राम पत्थर की विष्णुजी के रूप में पूजा की जाती है वैष्णव धर्म में इसका बहुत महत्व है पुराणों में यहाँ तक कहा गया है कि जिस घर में शालिग्राम न हो, वह घर घर नही श्मशान के समान है। इसके दर्शन मात्र से ब्रह्महत्या दोष से मुक्ति मिल जाती है। शालिग्राम पर चढ़े तुलसी पत्र को दूर करने वाले का दुसरे जन्म में उसकीं पत्नी साथ नही देती और उसे पत्नी का वियोग भी सहना पड़ता है।