Ethiclogy

क्यों माँ दुर्गा की मूर्ति में वेश्यालयों की मिटटी का ही उपयोग होता है ?



              

दुर्गा पूजा में माँ दुर्गा की भव्‍य मूर्तियों का एक खास महत्व होता है, शायद ही आप जानते होंगे कि उस मिट्टी का भी बेहद महत्‍व होता है जिनसे ये मूर्तियां तैयार की जाती हैं। ये मिट्टी कई विशिष्‍ठ स्‍थानों से लाकर तैयार की जाती है। जैसे पवित्र गंगा के किनारों से। फिर इसमें गोबर, गौमूत्र और थोड़ी सी मिट्टी निषिद्धो पाली से मंगाकर मिलायी जाती है। अब आप सोचेंगे कि निषिद्धो पाली क्या है, तो ये वेशओं के रहने के स्‍थान जिसके बाहर से मिट्टी लायी जाती है। मूर्ति बनाने वाले कलाकारों का कहना है कि परंपरा के मुताबिक जब तक मूर्ति में रेडलाइट एरिया की मिट्टी का इस्तेमाल नहीं किया जाता तब तक वह पूर्ण नहीं मानी जाती। हालांकि पहले कारीगर या फिर मूर्ति बनवाने वाले इन वेश्याओ के घरों से मिट्टी मांग कर लाते थे, लेकिन अब इसका कारोबार होने लगा है। इस मिट्टी को इस्तेमाल करने के पीछे मान्यता यह है कि जब कोई व्यक्ति ऐसी जगह पर जाता है तो उसकी सारी अच्छाइयां बाहर ही छोड़कर जाता हैं। उसी बाहर की मिट्टी को मूर्ति में लगाया जाता है। क्योकि वह सबसे पवित्र मानी गयी है. एक और मान्यता है कि दुर्गा मां ने अपनी एक भक्त वेश्या को वरदान दिया था कि तुम्हारे हाथ से दी हुई गंगा की चिकनी मिट्टी से ही मेरी प्रतिमा बनेगी। ऐसा उन्होंने उस भक्त को सामाजिक तिरस्कार से बचाने और उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर कहा था। तभी से वेश्यालय के बाहर की मिट्टी से माता की मूर्ति बनाने की परमपरा शुरू हुई। अमावस के दिन ही माँ दुर्गा की अधूरी प्रतिमा पर आँखे बनाई जाती है जिसे चक्षु-दान कहा जाता है इस दिन लोग अपने पूर्वजो का तर्पण करते है और उसके बाद ही माता का पर्व शुरू हो जाता है। कहते है माता इस दिन शिवजी को कैलाश में ही छोड़कर लक्ष्मी और सरस्वती माता के साथ अपने पीहर 10 दिनों के लिए आती है। बंगाल में लोग ग्रह-नक्षत्र देखकर यह पता लगाते है कि माँ दुर्गा किस पर सवार होकर आ रहीं है अगर माँ हाथी पर आ रहीं है तो दुनिया में चारों ओर खुशहाली होती है, अगर घोड़े पर आती है तो पृथ्वी पर सुखा पड़ता हें और बारिश नही होती, माँ अगर नौका में आयें तो बारिश अच्छी होती है फसल और नये साल का आगमन भी अच्छा होता है, यदि माँ झूले पर आती हें तो चारो और बीमारियां फैलती है। माना जा रहा हें कि इस बार माता की सवारी घोड़ा होगा।