Ethiclogy

दिवाली का पर्व क्यों मनाया जाता है ?



              

दिवाली का यह पर्व कार्तिक अमावस्या के दिन पुरे भारतवर्ष ही नही अपितु विदेशों में भी बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है इस दिन माँ लक्ष्मी की पूजा से घर में धन,सुख-शांति और गणेश जी की पूजा से ऋद्धि-सिद्धि प्राप्त होती है। माना जाता है कि राक्षस और देवताओं द्वारा समुन्द्र मंथन के समय देवी लक्ष्मी क्षीर सागर से कार्तिक महीने की अमावश्या को ब्रह्माण्ड में आयी थी। यही कारण है कि यह दिन माता लक्ष्मी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में दिवाली के त्यौहार के रूप में मनाना शुरू कर दिया।शास्त्रों के अनुसार दीपावली का यह पर्व भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के बनवास के बाद अयोध्या वापस लौटने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है जब श्रीराम वापस आये तब अयोध्यावासियों ने पुरे नगर में घी के दीपक जलाये और खुशियाँ मनाई तभी से यह पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाने लगा। इस दिन रात्रि जागरण कर माँ लक्ष्मी की आराधना करने का विशेष महत्व है मान्यता है कि इस दिन माँ लक्ष्मी रात्रि भ्रमण के लिए निकलती है और जो भक्त रत में जागकर उनकी पूजा करता है माता स्थाई रूप से उसके घर में निवास करती है। दिवाली के दिन ही व्यापारीगण अपने नये बहीखातों की शुरुआत कर उनकी पूजा करते है। दीवाली का यह त्योहार 5 दिनों तक धनतेरस से शुरू होकर भाईदूज तक चलता है। इन 5 दिनों में प्रत्येक दिन का एक अपना महत्व है जैसे – धनतेरस – इस दिन ही भगवान धन्वंतरि हाथ में स्वर्ण कलश लिए समुद्र मंथन से प्रकट हुए थे इसलिए इस दिन धन के देवता भगवान धन्वंतरि और कुबेरजी की पूजा होती है लोग अपने सामर्थ अनुसार सोना- चांदी, वस्त्र, आभूषण खरीदते है और घर में दीपक कर रंगोली बनाते है। नरक चौदस - इस दिन सूर्योदय से पूर्व शरीर पर तेल लगाकर स्नान करना चाहिए। ऐसा माना जाता है, कि इस दिन सूर्योदय के पश्चात स्नान करने वाले मनुष्य के वर्षभर के शुभ कार्य नष्ट हो जाते हैं। एवं इस दिन स्नान के पश्चात दक्षिण मुख करके यमराज से प्रार्थना करने पर व्यक्ति के वर्ष भर के पाप नष्ट हो जाते हैं। दीपावली - इस दिन रात्रि को जागरण करके धन की देवी लक्ष्मी माता का पूजन विधिपूर्वक करना चाहिए एवं घर के प्रत्येक स्थान को स्वच्छ करके वहां दीपक लगाना चाहिए जिससे घर में लक्ष्मी का वास एवं दरिद्रता का नाश होता है। इस दिन देवी लक्ष्मी, भगवान गणेश तथा द्रव्य, आभूषण आदि का पूजन करके 13 अथवा 26 दीपकों के मध्य एक तेल का दीपक रखकर उसको रातभर जलाये रखना चाहिए। गोवर्धन पूजा - इस दिन प्रातः जल्दी उठकर घर के द्वार पर गोबर से गोवर्धन बनाकर उसे फूलों से सजाते है और छप्पनभोग बनाकर उनकी पूजा करते है साथ ही गायों को भी सजाया जाता है और उनका का पूजन किया जाता है। भाईदूज - यह भाइयों और बहनों का त्यौहार है जो एक दूसरे के लिए अपने प्यार और देखभाल का प्रतीक है। आज के दिन यम अपनी बहन यमी (यमुना) से मिलने आये और अपनी बहन द्बारा उनका आरती के साथ स्वागत हुआ और उन्होंने साथ में खाना भी खाया। उन्होनें अपनी बहन को उपहार भी दिया।