Ethiclogy

सबसे अमीर होकर भी गरीब है तिरुपति बालाजी आखिर क्यों?



              

आखिर कर्ज मै क्यों डूबे है बालाजी - प्राचीन कथा के अनुसार एक बार महर्षि भृगु बैकुंठ पधारे और आते ही शेष शैया पर योगनिद्रा मै लेटे भगवान विष्णु की छाती पर एक लात मारी। भगवान विष्णु ने तुरंत उनके चरण पकड़ लिए और पूछा कि ऋषिवर पैर मे चोट तो नही लगी। भगवान विष्णु का इतना कहना था कि भृगु ऋषि ने दोनों हाथ जोड़ लिए और कहने लगे प्रभु आप ही सबसे सहनशील देवता है इसलिए यज्ञ भाग के प्रमुख अधिकारी आप ही है। लेकिन देवी लक्ष्मी को भृगु ऋषि का यह व्यवहार पसंद नहीं आया और वह विष्णु जी से नाराज हो गई। नाराजगी इस बात से थी कि भगवान ने भृगु ऋषि को दंड क्यों नही दिया। नाराजगी मे देवी लक्ष्मी बैकुंठ छोड़कर चली गई। भगवान विष्णु ने देवी लक्ष्मी को ढूंढना शुरू किया तो पता चला की देवी ने पृथ्वी पर पध्मावती नाम की कन्या के रूप में जन्म लिया है। भगवान विष्णु ने भी तब अपना रूप बदला और पहुँच गए पद्मावती के पास। भगवान ने उनके सामने विवाह का प्रस्ताव रखा जिसे देवी ने स्वीकार कर लिया। परन्तु उनके पिता ने विष्णुजी (बालाजी) से विवाह के लिए धन माँगा, लेकिन प्रश्न यह था की विवाह के लिए धन कहाँ से आये ? तब विष्णु जी ने इस समस्या का समाधान निकलने के लिए भगवान शिव और ब्रम्हा को साक्षी मानकर कुबेर से काफी धन कर्ज पर ले लिया। इस धन से भगवान वेंकटेश और माता पद्मावती का विवाह संपन्न हुआ। कुबेर से कर्ज लेते समय भगवान ने वचन दिया था कि वह कलयुग के अंत तक सारा कर्ज चूका देंगे। कर्ज के समाप्त होने तक वह सूद चुकाते रहेंगे। भगवान के कर्ज में डूबे रहने की प्रथा के कारण भक्त बड़ी मात्रा मे दान करते है। ताकि भगवान कर्ज मुक्त हो जाये। भगवान को मिली धन दौलत के कारण वह 50 करोड़ के मालिक हो गए है।