Ethiclogy

कार्तिक माह पूजा की दृष्टि से इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है ?



              

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार पूरे वर्ष में बारह माह हैं। हर माह की अपनी-अपनी विशेषता है। प्रत्येक माह में अलग अलग देवों की आराधना की जाती है। इन बारह मासों में कार्तिक माह आठवें स्थान पर आता है। शास्त्रों में कार्तिक माह को बड़ा ही पवित्र माह माना जाता है। इस माह में व्रत, पूजा, स्नान का खास महत्व होता है.और कई बड़े-बड़े त्योहार भी मनाये जाते हैं. ये महीना शरद पूर्णिमा से शुरू होता है और कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है. इस पूरे माह में पवित्र नदियों और तालाबों में स्नान किया जाता है. यानि कि सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करने का महत्व होता है. मान्यता है कि कार्तिक माह में सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करने से भगवान विष्णु खुश होकर अपने भक्तों पर कृपा बनाए रखते है. महिलाएं सुबह स्नान करने के बाद पूजा कर मंगल गीत भी गाती हैं. पुराणों के आधार पर कहा जाता है कि कार्तिक स्नान और पूजा के पुण्य से ही सत्यभामा को भगवान श्री कृष्ण की पत्नी होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. पूरे कार्तिक माह पूजा में विशेष पूजा जाती है. इस दौरान शराब-ध्रूमपान आदि सब निषेध होता है. इस दौरान प्याज, लहसुन, मीट मछली नहीं खानी चाहिए. जो लोग कार्तिक स्नान और व्रत करते हैं उन लोगों को नीचे जमीन पर सोना चाहिए। इस दौरान विशेषकर तुलसी और सूर्य देव को जल चढ़ाया जाता है. कार्तिक महीने में तुलसी को सुबह-शाम दिया-बत्ती करनी चाहिए. इस पूरे माह मूंगफली, गजक, अन्नकूट का भोग लगाया जाता है. अन्नकूट को विशेष रूप से इस त्योहार के लिए तैयार किया जाता है इस मास की विशेषता का वर्णन स्कन्द पुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण में भी दिया गया है। स्कन्द पुराण में लिखा है कि सभी मासों में कार्तिक माह, देवताओं में विष्णु भगवान, तीर्थों में बद्रीनारायण तीर्थ शुभ है। पदम पुराण के अनुसार कार्तिक माह धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष देने वाला है। कार्तिक माह में एक हज़ार बार यदि गंगा स्नान करें और माघ मास में सौ बार स्नान करें, वैशाख मास में नर्मदा में करोड़ बार स्नान करें और प्रयाग में कुम्भ के समय पर स्नान करने से जो फल प्राप्त होता है वही फल कार्तिक माह में किसी नदी में स्नान करने और दीपदान करने से मिलता है| दीपदान करने से मनुष्य के सारे पाप नष्ट होते हैं। स्कंद पुराण में वर्णित है कि इस मास में जो व्यक्ति देवालय, नदी के किनारे, तुलसी के समक्ष एवं शयन कक्ष में दीपक जलाता है उसे सर्व सुख प्राप्त होते हैं। इस मास में भगवान विष्णु एवं लक्ष्मी के निकट दीपक जलाने से अमिट फल प्राप्त होते हैं। इस माह में की गई भगवान विष्णु एवं माँ लक्ष्मी की उपासना असीमित फलदायी होती है। शास्त्रों के अनुसार इस माह भगवान विष्णु चार माह की अपनी योगनिद्रा से जागते हैं| विष्णु जी को निद्रा से जगाने के लिए महिलाएं विष्णु जी की सखियां बनती हैं और दीपदान तथा मंगलदान करती हैं। कार्तिक मास में तुलसी आराधना का विशेष महत्व है | इस मास में तुलसी विवाह की भी परंपरा है जो कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है। इसमें तुलसी के पौधे को सजाया संवारा जाता है एवं भगवान शालिग्राम का पूजन किया जाता है। तुलसी का विधिवत विवाह किया जाता है पद्म पुराण में भी वर्णित है कि जो मनुष्य कार्तिक में तिल दान, नदी स्नान, साधू-संतों की सेवा, भूमि शयन, मौन व्रत का पालन, तिल मिश्रित जल से स्नान, अखाद्य पदार्थों का त्याग तथा पलाश पत्र के पत्तल में भोजन करता है, उसके सभी युगों के सम्पूर्ण पाप स्वत: नष्ट हो जाते हैं और वह 14 इंद्रियों की दुर्गति में कभी नहीं पड़ता, उसे समस्त तीर्थों का पुण्य फल प्राप्त होता है