Ethiclogy

मनुष्य जीवन दुर्लभ क्यों होता है ?



              

प्राचीनकाल में हमारे ऋषि मुनियों ने इस बात समर्थन किया है कि मनुष्य जीवन अपने आप में अदभुत एवं महान है भगवान ने प्रथ्वी पर मनुष्य की 84 लाख योनियाँ बनाई है जिसमे जीवात्मा को सभी योनियों में भटकने के बाद मनुष्य जीवन प्राप्त होता है मान्यतानुसार पेड़-पौधों में 30 लाख,कीड़े-मकोडो में 27 लाख,पक्षी में 14 लाख पानी के जीव में 9 लाख और पशुओ में 4 लाख योनियाँ पाई जाती है। मनुष्य योनि को सर्वश्रेष्ठ एसलिय माना जाता है क्योकि इस योनि में ही मनुष्य को जन्म-जन्मांतर के बंधन से मुक्ति मिल सकती है। इसलिए अच्छे कर्म करना चाहिए।