Ethiclogy

ग्रहण काल में भोजन करना वर्जित क्यों होता है ?



              

ऋषि मुनियों ने सूर्य और चंद्रग्रहण के समय भोजन करने के लिए मना किया है,क्योकि उनकी मान्यता थी कि ग्रहण के दौरान खाने की वस्तुओं, जल आदि में सूक्ष्मजीवाणु एकत्रित होकर उसे दूषित कर देते है। शास्त्रों में कहा गया है कि ग्रहण के बाद स्नान कर पवित्र होकर ही भोजन करना चाहिए। ग्रहण के समय भोजन करने से सूक्ष्म कीटाणुओं के पेट में जाने से बीमार होने की सम्भावना बढ़ जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि ग्रहण लगने के 10 घंटे पूर्व से ही उसका कुप्रभाव शुरू हो जाता है जिसे सुतकाल कहा जाता है एसलिय सुतकाल और ग्रहणकाल में भोजन करना वर्जित है ग्रहण के समय खाद्य प्रदार्थ में तुलसीदल डाल दिया जाता है जिसके प्रभाव से भोज्य प्रदार्थ दूषित होने से बच जाते है।