Ethiclogy

क्यों सूर्यदेव खरमास में करते हैं गधे की सवारी ?



              

अपने गुरु धनु राशि में पहुंचते ही समेट लेता है. अपने प्रभाव को छिपा लेता है और गुरु को साष्टांग नमन कर प्रभावहीन हो जाता है. ऊर्जा के देवता के प्रभावहीन हो जाने पर समस्त शुभ कार्य वर्जित हो जाते हैं, क्योंकि किसी भी कार्य में ऊर्जा की जरूरत होती है. सूर्यदेव अपने सात घोड़ों के रथ में भ्रमण कर रहे थे. घूमते घूमते अचानक उनके घोड़े प्यास बुझाने के लिए तालाब के किनारे पानी पीने लगे. पानी पीने के बाद घोड़ों को आलस्‍य आ गया और तभी सूर्यदेव को स्मरण हुआ कि सृष्टि के नियमानुसार उन्हें निरंतर ऊर्जावान होकर चलते रहने का आदेश है. घोड़ों के थक जाने के बाद सूर्यदेव को तालाब के किनारे दो गधे दिखाई दिए. सूर्यदेव उन गधों को अपने रथ में जोतकर वहां से चल दिए. इस तरह सूर्यदेव इस पूरे माह मंद गति से गधों की सवारी से चलते रहे. इस समय उनका तेज भी कम हो गया. पुनः मकर राशि में प्रवेश करने के समय एक माह पश्चात वह अपने सातों घोड़ों पर सवार हुए. और इसी तरह हर साल यह चक्र चलता रहता हैं। शायद यही कारण है कि पूरे पौष मास में धरती के उत्तरी गोलार्द्ध में सूर्य का प्रभाव कम हो जाता है और उनकी किरनें की धीमी हो जाती हैं।