Ethiclogy

क्यों दिया शिवजी ने पांडवों को पुनर्जन्म का श्राप ?



              

महाभारत युद्ध के अंतिम दिन जब दुर्योधन अपनी अंतिम साँस ले रहा था तब उसने अश्वत्थामा को अपना सेनापति नियुक्त कर दिया. और कहा कि मुझे पांचो पांड्वो का कटा हुआ शीश देखना है अब यह कार्य तुम नीति पूर्वक करो या अनीति पूर्वक। दुर्योधन को वचन देकर अश्वत्थामा पांड्वो की मृत्यु का षडयंत्र रचने चला गया। भगवान कृष्ण यह जानते थे कि युद्ध के अंतिम दिन काल कुछ न कुछ अनिष्ट जरुर करेगा. अत: उन्होंने शिव जी की आराधना प्रारम्भ कर उन्हें प्रसन्न कर लिया। और कृष्ण जी में उन्हें पांड्वो की रक्षा के लिए शिविर के बाहर नियुक्त कर दिया। कुछ समय पश्चात पांडव नदी में स्नान करने के लिए चले गए और अपने पुत्रो को वहीं सोता छोड़ गए। आधी रात के बाद अश्वत्थामा, कृपाचार्य और कृतवर्मा शिविर के पास पहुँचे और मन ही मन शिव जी की आराधना कर उन्हें प्रसन्न कर लिया. और शिविर में जाने की आज्ञा प्राप्त कर ली। फिर अश्वत्थामा ने शिविर में घुसकर पांड्व समझ उनके पुत्रो की हत्या कर दी। और वहाँ से चला गया. जब पांडव वापस आये और इस बारे में ज्ञात हुआ तो उन्होंने इसे शिवजी की ही करनी समझ उनसे युद्ध करने चले गए। जैसे ही पांडव शिवजी के समक्ष युद्ध करने पहुंचे उनके सारे अस्त्र शिवजी में समा गए. परन्तु क्योकि पांडव उनकी शरण में थे और शिवजी ने उन्हें रक्षा का वचन दिया था इसलिए शिव जी ने कहा कि अभी तो मैं तुम्हे क्षमा करता हूँ परन्तु तुम्हें कलयुग में इस अपराध की सजा भुगतना पड़ेगी ऐसा कह शिव अंतर्ध्यान हो गए। शिवजी की यह बात सुनकर पांड्वो को अपनी भूल का अहसास हुआ और वह कृष्ण जी के पास गए. तब कृष्ण जी ने कहा कि शिवजी का कथन सत्य होकर ही रहेगा परन्तु कलयुग में जन्म लेने के बाद तुम सब पाप मुक्त हो जाओगे. और यह बताया कि कौन किस नाम से और कहाँ पैदा होगा.. कलियुग में युधिष्ठिर राजा वत्सराज के पुत्र बनेंगे और उनका नाम मलखान होगा । भीम वीरण के नाम से जन्मे लेंगे और बनारस के राजा बनेगे। अर्जुन का जन्म परिलोक नाम के राजा के यहां होगा और उनका नाम ब्रह्मानन्द होगा। नकुल का जन्म कान्यकुब्ज के राजा रत्नभानु के घर हुआ और उनका नाम लक्षण था। सहदेव ने भीमसिंह नामक राजा के घर में देवीसिंह के नाम से जन्म लिया। कलियुग में धृतराष्ट्र का जन्म अजमेर में पृथ्वीराज के रूप में हुआ था।