Ethiclogy

दाऊ भैया क्यों नहीं हुए थे महाभारत युद्ध में शामिल!



              

महाभारत का युद्ध कौरव और पांडव के बीच लड़ा गया था। यह युद्ध द्वापरयुग में कुरुक्षेत्र के मैदान में हुआ है। कुरुक्षेत्र वर्तमान में हरियाणा में है। महाभारत में एक बहुत ही रोचक प्रसंग का उल्लेख है।हुआ यूं कि महाभारत युद्ध में संपूर्ण भारतवर्ष से, सिर्फ दो ही राजा युद्ध में शामिल नहीं हुए थे एक बलराम और दूसरे भोजकट के राजा रुक्मी। रुक्मी की छोटी बहन रुक्मिणी श्रीकृष्ण की पत्नी थीं।कुरुक्षेत्र के मैदान में युद्ध की तैयारियां अपने चरम पर थीं। लेकिन, एक दिन भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम, पांडवों की छावनी में अचानक पहुंचे। दाऊ भैया (बलराम) को आता देख श्रीकृष्ण, युधिष्ठर आदि बड़े प्रसन्न हुए। सभी ने उनका आदर किया। सभी को अभिवादन कर बलराम, धर्मराज के पास बैठ गए।दाऊ भैया काफी दुःख थे। उन्होंने कहा भारत में लालच, क्रोध और द्वेष का बोलबाला हो गया है। महाभारत युद्ध की वजह से सारा संसार भयानक, वीभत्स दृश्यों से भर गया है।हमारे लिए तो पांडव और कौरव दोनों ही एक समान हैं। दोनों को मूर्खता करने की सूझी है। इसमें हमें बीच में पड़ने की आवश्यकता नहीं, पर कृष्ण ने मेरी एक न मानी। अर्जुन के प्रति उसका स्नेह इतना ज्यादा है कि वह कौरवों के विपक्ष में है।अब जिस तरफ कृष्ण हों, उसके विपक्ष में कैसे जाऊं? दाऊ भैय्या थोड़ा सहम गए और फिर बोले, भीम और दुर्योधन दोनों ने ही मुझसे गदा सीखी है। दोनों ही मेरे शिष्य हैं। दोनों पर मेरा एक जैसा स्नेह है। इन दोनों कुरुवंशियों को आपस में लड़ते देखकर मुझे अच्छा नहीं लगता। अतः मैं तीर्थ यात्रा पर जा रहा हूं। और इस तरह बलराम यु्दध में शामिल नहीं हुए और रुक्मी को जब यह पूरा प्रसंग पता चला तो उन्होंने भी महाभारत युद्ध में हिस्सा न लेने का निर्णय लिया।