Ethiclogy

क्यों है ब्रह्मा जी का पुरे भारत में एक ही मंदिर ?



              

पत्नी सावित्री ने दिया था ब्रह्मा जी को श्राप क्यों? – पद्म पुराण के अनुसार एक समय धरती पर वज्रनाश नामक राक्षस ने उत्पात मचा रखा था। उसके बढते अत्याचारों से तंग आकार ब्रम्हा जी ने उसका वध किया। लेकिन वध करते वक्त उनके हाथो से तीन जगहों पर कमल का पुष्प गिरा, इन तीनो जगहों पर तीन झीलें बनी। इसी घटना के बाद इस स्थान का नाम पुष्कर पड़ा। इस घटना के बाद ब्रम्हा ने संसार की भलाई के लिए यहाँ एक यज्ञ करने का फैसला किया। ब्रम्हा जी यज्ञ करने हेतु पुष्कर पहुँच गए लेकिन किसी करणवश सावित्री जी समय पर नही पहुँच सकी। यज्ञ को पूर्ण करने के लिए उनके साथ उनकी पत्नी का होना जरुरी था, लेकिन सावित्री जी के नही पहुँचने की वजह से उन्होंने गुर्जर समुदाय की एक कन्या गायत्री से विवाह कर यज्ञ शुरू किया। उसी दौरान देवी सावित्री वहीँ पहुंची और ब्रम्हा के बगल मैं दूसरी कन्या को बैठा देख क्रोधित हो गई। उन्होंने ब्रम्हा जी को श्राप दिया कि देवता होने के बाबजूद कभी भी उनकी पूजा नहीं होगी। सावित्री के इस रूप को देखकर सभी देवता लोग डर गए। उन्होंने उनसे विनती की कि अपना श्राप वापस ले लीजिए। लेकिन उन्होंने नहीं लिया, जब गुस्सा ठंडा हुआ तो सावित्री ने कहा कि इस धरती पर सिर्फ पुष्कर मैं आपकी पूजा होगी। कोई भी दूसरा आपका मंदिर बनाएगा तो उसका विनाश हो जाएगा। भगवान विष्णु ने भी इस काम मैं ब्रम्हा जी का साथ दिया था इसलिए देवी ने विष्णु जी को भी अपनी पत्नी से विरह का कष्ट सहन करने का श्राप दिया था इसी कारण भगवान विष्णु ने राम अवतार मैं सीता जी के वियोग का कष्ट सहा था। पुष्कर मैं सावित्री जी का भी मंदिर है लेकिन वो ब्रम्हा जी के पास न होकर उनके मंदिर के पीछे एक पहाड़ी पर स्थित है।