Ethiclogy

कौन थे भगवान दत्तात्रेय ?



              

यह गुरु वंश के प्रथम गुरु एवम योगी थे।शैव मत वाले इन्हें शिव का अवतार और वैष्णव मत वाले इन्हे विष्णु का अवतार मानते है। अलग-अलग धर्म ग्रंथो में इनकी अलग पहचान बताई गई है इन्हे ब्रम्हा, विष्णु, महेश का सम्मिलित अवतार भी कहा गया है। कहीं इन्हे ब्रम्हा जी का मानस पुत्र तो कही इन्हे अत्रि और अनुसूइया का पुत्र बताया गया है इन्हे विष्णु जी का अवतार भी माना जाता है। इनके जीवन में गुरु की महत्ता को बताया गया है जीवन में गुरु की अपनी एक विशेष जगह है। कहते है बिना गुरु के ज्ञान प्राप्त नहीं होता। सच्चा ज्ञान प्राप्त करने के लिए आपको किसी न किसी को गुरु बनाना पड़ता है चाहे फिर वो एकलव्य की तरह मिट्टी की मूरत ही क्यों ना हों। उन्होंने अपने जीवन में 24 गुरु बनाये थे जिसमे किट, पक्षी, जानवर भी शामिल थे वे जिससे भी सीखते थे उन्हें अपना गुरु मानते थे उनके 24 गुरु थे – पृथ्वी, पिंगला वेश्या, कबूतर, सूर्य, वायु, हिरन, पतंगा, मधुमक्खी, समुद्र, हाथी, जल, बालक, आग, चंद्रमा, कुमारी कन्या, मछली, तीर बनाने वाला, सांप, मकड़ी कुर्र पक्षी, भृंगी कीड़ा, अजगर, भोंरा। इन्हे हिन्दू धर्म की त्रिवेणी भी कहा गया है।