Ethiclogy

चित्रगुप्त कौन थे और उनका जन्म कैसे हुआ था ?



              

जब ब्रह्माजी जी ने यमराज को मनुष्यों के अच्छे-बुरे कर्मो के लेखा-जोखा करने का कार्य सौपा तो यमराज जी ने अपने कार्य के लिए एक सहयोगी की मांग की क्योकि वह अकेले इस कार्य को करने में असमर्थ थे, तब ब्रह्माजी सोच में पड़ गए और बोले कि में तुम्हारी अवश्य सहायता करूंगा, यह कहकर वह ध्यान में चले गए। फिर उनकी एक हजार वर्ष की तपस्या के बाद एक पुरूष उत्पन्न हुआ। जब उनकी आँखे खुली तो उन्होंने देखा कि श्याम रंग का पुरुष हाथ में कलम,दवात लिए उनके समक्ष खड़ा है। यह देखकर ब्रह्मा जी ने उससे पूछा तुम कौन हो ?, तो उसने कहा कि मेरा जन्म आपके शरीर से हुआ है इसलिए मेरा नामकरण कीजिए। और बताईये कि मेरे लिए क्या कार्य है। तब ब्रह्माजी ने जबाब दिया कि तुम्हारा जन्म मेरी काया से हुआ है इसलिए तुम कायस्थ कहलाओगे और तुम्हारा नाम चित्रगुप्त होगा। अब तुम यमपुरी में जाओ और धर्म के लेखा-जोखा में धर्मराज के सहायक बनो इसलिए ही तुम्हारा जन्म हुआ है। धर्मराज की पूरी में तुम्हारा कार्य मनुष्य के धर्म-अधर्म का विचार कर निर्णय करना होगा और तुम आजीवन धर्मराज के सहायक बने रहोगे।