Ethiclogy

सप्तऋषि कौन है ?



              

हिन्दू धर्म मे वेदों का अधिक महत्व है चारों वेदों में हजारो मन्त्र है और इन मन्त्रो की रचना की है ऋषियों ने । हिन्दू धर्म के ऋषियों में सप्त ऋषि ऐसे है जिनका इस धर्म में सबसे ज्यादा योगदान माना जाता है आकाश में सात तारो का एक मंडल नजर आता है उन्हें सप्तऋषि मंडल कहते है इस मंडल के तारों के नाम भारत के सात महान ऋषियों के नाम पर रखे गये है। और यह सप्त ऋषि ध्रुव तारे की परिक्रमा करते है हिन्दू पुराणों ने काल को मन्वंतरों में विभाजित कर प्रत्येक मन्वंतर में हुए ऋषियों के ज्ञान और उनके योगदान को परिभाषित किया है। प्रत्येक मन्वंतर में प्रमुख रूप से 7 प्रमुख ऋषि हुए हैं। विष्णु पुराण के अनुसार जो इस प्रकार है 1. प्रथम स्वायंभुव मन्वंतर में- मरीचि, अत्रि, अंगिरा, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु और वशिष्ठ। 2. द्वितीय स्वारोचिष मन्वंतर में- ऊर्ज्ज, स्तम्भ, वात, प्राण, पृषभ, निरय और परीवान। 3. तृतीय उत्तम मन्वंतर में-हर्षि वशिष्ठ के सातों पुत्र। 4. चतुर्थ तामस मन्वंतर में- ज्योतिर्धामा, पृथु, काव्य, चैत्र, अग्नि, वनक और पीवर। 5. पंचम रैवत मन्वंतर में- हिरण्यरोमा, वेदश्री, ऊर्ध्वबाहु, वेदबाहु, सुधामा, पर्जन्य और महामुनि। 6. षष्ठ चाक्षुष मन्वंतर में- सुमेधा, विरजा, हविष्मान, उतम, मधु, अतिनामा और सहिष्णु। 7. वर्तमान सप्तम वैवस्वत मन्वंतर में- कश्यप, अत्रि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और भारद्वाज। अब हम जानेंगे कि यह मन्वन्तर होता क्या है – मन्वन्तर यानी कि मनु +अंतर। एक ऐसा समय जो एक मनु के जीवन की व्याख्या करता है सृष्टि के रचियता ब्रम्हा जी ने इस सृष्टि को चलाने के लिए मनु की रचना की। फिर मनु ने यह संसार आगे बढ़ाया और यह संसार में कई चीजों की रचना की. इन सबकी रचना करते हुए मनु जितने साल जीवित रहे उस समय अवधि को मन्वन्तर कहा गया है। जैसे ही एक मनु की मृत्यु हुई तो ब्रम्हा जी द्वारा दुसरे मनु की उत्पत्ति हो जाती है इन मन्वन्तरो के आधार पर ऋषियों का उल्लेख किया गया है हर मन्वन्तर के अलग अलग सप्तऋषि होते है।