Ethiclogy

लाभ पंचमी क्या हैं और यह क्यों मनाई जाती हैं ?



              

दीपावली पर्व के बाद आने वाली कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को लाभ पंचमी(सौभाग्य पंचमी) के नाम से जाना जाता है। सौभाग्य पंचमी जीवन में सुख और सौभाग्य की वृद्धि करती है इस दिन भगवान शिव की पूजा सभी सांसारिक कामनाओं को पूरा कर परिवार में सुख-शांति लाती है तथा श्री गणेश पूजन समस्त विघ्नों का नाश कर काराबोर को समृद्धि और प्रगत्ति प्रदान करता है। जीवन में बेहतर और सुखी जीवन सभी की चाह हर मनुष्य की होती है। इसलिए हर व्यक्ति कार्यक्षेत्र के साथ पारिवारिक सुख-समृद्धि की भी कामना रखता है। इस दिन से नए बहीखाते लिखना प्रारंभ करने का भी विशेष महत्व है। बही खाते में लिखते समय दाईं तरफ लाभ और बाईं तरफ शुभ लिखने से जीवन में शुभता का संचार होता है। ऐसा माना जाता है कि दिवाली से गुजराती नववर्ष की शुरुआत के साथ ही लाभ पंचमी का दिन व्यापार में तरक्की की शुरुआत के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इसलिए यह दिन खासतौर पर गुजरात में अति महत्वपूर्ण माना जाता है। शुभ तिथि दीवाली पर्व का ही एक हिस्सा कही जाती है कुछ स्थानों पर दीपावली के दिन से नववर्ष की शुरुआत के साथ ही सौभाग्य पंचमी को व्यापार व कारोबार में तरक्की और विस्तार के लिए भी बहुत ही शुभ माना जाता है। भारत के कुछ हिस्सों में दीपावली का त्यौहार धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज पर समाप्त हो जाता है परन्तु गुजरात में यह दीवाली का पर्व धनतेरस से शुरू होकर लाभ पंचमी पर समाप्त होता हैं।