Ethiclogy

अधिकमास क्या होता है ? और हिन्दू मान्यता में क्या है इसका महत्व ।



              

हिंदू पंचांग के हिसाब से तीन वर्षों तक तिथियों का क्षय होता है। और इन तिथियों का क्षय होते होते तीसरे वर्ष एक माह बन जाता है। इस वजह से हर तीसरे वर्ष में अधिकमास होता है। अधिक मास को मल मास, पुरूषोत्तम मास भी कहा जाता हैं। विशेष बात यह है कि अधिक मास चैत्र से अश्विन मास तक ही होते है। कार्तिक, मार्गशीर्ष पौष मास में क्षय मास होते हैं तथा माघ फाल्गुन में अधिक या क्षय मास कभी नहीं होते। जिस माह में सूर्य संक्रांति नहीं होती वह अधिक मास होता है, इसी प्रकार जिस माह में दो सूर्य संक्रांति होती हैं वह क्षय मास कहलाता है। इन दोनों ही मासों में मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। हालांकि इस दौरान धर्म-कर्म के पुण्य फलदायी होते हैं। मलमास में केवल इश्वर की भक्ति,दान पूण्य,व्रत,हवन आदि करने का विधान है ऐसा करने से किए हुए पापों से मुक्ति मिल जाती है।