Ethiclogy

शनिदेव के 9 वाहन कौन से है और उनकी विशेषता क्या हैं ?



              

हमारे शास्त्रों में शनिदेव को न्याय का देवता माना गया है यानि मनुष्य के अच्छे-बुरे कर्मो का फल शनिदेव उन्हें देते हैं शनि चालीसा में उनके वाहनों का उल्लेख किया गया हैं वैसे तो शनिदेव का वाहन कौआ को माना गया है परन्तु इसके अलावा उनके और भी वाहन हैं। कहते हैं कि शनिदेव जिस वाहन पर सवार होकर जिस राशि में प्रवेश करते उसके अनुसार ही मनुष्य के कर्मो का फल देते हैं। शनिदेव के वाहन इस प्रकार हैं - वाहन हंस - शनिदेव का वाहन यदि हंस हो तो यह बहुत शुभ होता हैं मनुष्य अपनी बुद्दि और महनत करके भाग्य का सहयोग प्राप्त कर सकता हैं. हंस को शनिदेव के वाहनों में सबसे शुभ माना गया हैं। वाहन मोर - शनिदेव का वाहन मोर भी शुभ माना गया है यह मनुष्य को महनत कर अपना भाग्य बनाने का मौका देता है और व्यक्ति अपनी समझदारी से बड़ी से बड़ी परेशानी से मुक्त हो सकता हैं। वाहन गधा - यदि शनिदेव गधे पर सवार होकर आये तो यह शुभ नही माना जाता है और जातक को शुभ फल मिलने में कमी होती हैं ऐसे में जातक को सफलता के लिए प्रयास करते रहना चाहिए। वाहन घोडा- यदि शनिदेव की सवारी घोडा हो तो यह शुभ होता हैं घोड़े को शक्ति का प्रतीक माना गया है इसलिए व्यक्ति इस समय जोश से भरपूर होता है और अपने कार्यो में सफल होता है। वाहन हाथी - यदि जातक के लिए शनिदेव का वाहन हाथी हो तो इसे शुभ नही माना जाता है यह जातक को आशा के विपरीत फल देता है, एसलिए ऐसे समय में मनुष्य को हिम्मत से काम लेना चाहिए। वाहन कौआ - यदि शनिदेव की सवारी कौआ हो तो इस समय जातक के जीवन में कलह की बढोत्तरी होती है,इसलिए ऐसे में मनुष्य को कलह से बचना चाहिए और सयंम से काम लेना चाहिए। वाहन भैसा - यदि शनिदेव का वाहन भैसा हो तो यह जातक को मिला-जुला फल देता है,इस समय मजातक को समझदारी और होशियारी से काम करना चाहिए, नही तो बुरे फलों की बढत हो सकती है। वाहन सिंह - यदि शनिदेव सिंह पर सवार होकर आते हैं तो यह शुभ होता हैं इस समय जातक को चतुराई से काम लेना होता है और अपने विरोधियों से डरना नही चाहिए बल्कि उनका सामना करना चाहिए। वाहन सियार - यदि वाहन सियार हो तो जातक को शुभ संकेत नही मिलते हैं और इस समय अशुभता की बढत होती है, ऐसे में सयंम से काम लेना होता हैं।