Ethiclogy

कथा माँ बगलामुखी की



              

एक बार सतयुग में महाविनाश उत्पन्न करने वाला ब्रह्मांडीय तूफान उत्पन्न हुआ, जिससे संपूर्ण विश्व नष्ट होने लगा इससे चारों ओर हाहाकार मच गया। सम्पूर्ण नष्ट होता देख भगवान विष्णु चिंतित हो गये और शिव जी के पास गये तब उन्होंने विष्णु जी को माँ शक्ति के पास जाने को कहा क्योकि उनके अलावा कोई और ये विनाश नही रोक सकता था। तब विष्णु जी ने हरिद्रा नदी के निकट जाकर कठिन तप किया जिससे माता प्रसन्न हुई और हरिद्रा नदी में स्नान करते समय माता के ह्रदय से एक एक तेज उत्पन्न हुआ जिससे देवी बगलामुखी रूप में प्रकट हुई। मां बगलामुखी माता की आठवीं महाविद्या हैं। इनका प्रकाट्य स्थल गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में माना जाता है। हल्दी रंग के जल से इनका प्रकट होना बताया जाता है। हल्दी का रंग पीला होने से इन्हें पीताम्बरा देवी भी कहते हैं। इनके कई स्वरूप हैं। इस महाविद्या की उपासना रात्रि काल में करने से विशेष सिद्धि की प्राप्ति होती है। इनके भैरव महाकाल हैं। मां बगलामुखी स्तंभव शक्ति की अधिष्ठात्री हैं अर्थात यह अपने भक्तों के भय को दूर करके शत्रुओं और उनके बुरी शक्तियों का नाश करती हैं। माता को पीला रंग अति प्रिय है इसलिए इनके पूजन में पीले रंग की सामग्री का उपयोग सबसे ज्यादा होता है. देवी बगलामुखी का रंग स्वर्ण के समान पीला होता है अत: साधक को माता बगलामुखी की आराधना करते समय पीले वस्त्र ही धारण करना चाहिए। देवी में संपूर्ण ब्रह्मांड की शक्ति का समावेश हैं माता बगलामुखी की शत्रुनाश, वाकसिद्धि, वाद विवाद में विजय पाने के लिए उपासना की जाती है इनकी उपासना से शत्रुओं का नाश होता है तथा भक्त का जीवन हर प्रकार की बाधा से मुक्त हो जाता है। बगला शब्द संस्कृत भाषा के वल्गा का अपभ्रंश है, जिसका अर्थ होता है दुलहन है अत: मां के अलौकिक सौंदर्य और स्तंभन शक्ति के कारण ही इन्हें यह नाम प्राप्त है। बगलामुखी देवी रत्नजडित सिहासन पर विराजती होती हैं। रत्नमय रथ पर आरूढ़ हो शत्रुओं का नाश करती हैं। देवी के भक्त को तीनों लोकों में कोई नहीं हरा पाता, वह जीवन के हर क्षेत्र में सफलता पाता है देवी को पीली हल्दी के ढेर पर दीप-दान करें, देवी की मूर्ति पर पीला वस्त्र चढ़ाने से बड़ी से बड़ी बाधा भी नष्ट होती है, बगलामुखी देवी के मन्त्रों सर्वसिधि दायक होता है।