Ethiclogy

ऋषि कश्यप से हुई सम्पूर्ण जाति की उत्पत्ति



              

ऋषि कश्यप ब्रम्हा के मानस पुत्र मरीचि के पुत्र थे इसलिए वह ब्रम्हा जी के पोते थे ऋषि कश्यप ने 17 कन्याओ से विवाह किया था जिसमे से 13 दक्ष प्रजापति की कन्याएं थी इन 17 कन्याओ की संतानों से सारा संसार भर गया उनकी पत्नियों के नाम है –दिति, अदिति, दनु, काष्ठा, अरिष्ठा, सुरसा, इला, मुनि, क्रोधवशा, ताम्रा, सुरभि, सर्पा, तिमि। और बाकि की –विनता, कदू, पतंगी, यामिनी।अदिति इनके पुत्र इस प्रकार है- अदिति : 12 आदित्यो का जन्म हुआ। दिति : 2 पुत्र और एक पुत्री का जन्म हुआ। दनु : 61 महान वीर पुत्रों की उत्पत्ति हुई। काष्ठा : एक खुर वाले घोड़े आदि पशु उत्पन्न हुए। अरिष्ठा : गन्धर्वो की उत्पत्ति हुई। सुरसा : यातुधन नामक राक्षसों की उत्पत्ति हुई। इला : सभी वृक्ष समूहों की उत्पत्ति हुई। मुनि : अप्सराओं के समूहों की उत्पत्ति हुई। क्रोधवशा : डसने वाले सांप, बिच्छु आदि विषैले जंतुओं की उत्पत्ति हुई। ताम्रा : बाज,गिद्ध शिकारी पक्षियों की उत्पत्ति हुई। सुरभि : गाय,भेंस, सब दो खुर वाले पशुओं की उत्पत्ति हुई। सर्पा : व्याघ्र आदि हिंसक जीवो की उत्पत्ति हुई। तिमि :समस्त जल जन्तुओ की उत्पत्ति हुई। विनता : गरुण(विष्णु का वाहन) और वरुण(सूर्य का सारथी) उत्पन्न हुए। कदू :भुत से नागों की उत्पत्ति जिसमे 8 प्रमुख थे- शेष, वासुकी, तक्षक, कर्कोटक, पद्म, महापद्म, शंख और कुलिक। पतंगी : पक्षियो का जन्म हुआ। यामिनी :शलभो(पतंगो) का जन्म हुआ। ब्रह्माजी की आज्ञा से प्रजापति कश्यप ने वैश्वानर की दो पुत्रियों पुलोमा और कालका के साथ भी विवाह किया। इनकी गणना सप्तर्षि गणों में की जाती थी। इन्हीं के नाम पर कश्यप गोत्र भी बना है।