Ethiclogy

माँ दुर्गा के नौ रूप स्त्री के जीवन का प्रतिबिम्ब है ।



              

माँ दुर्गा के नौ रूप एक स्त्री के सम्पूर्ण जीवनचक्र का एक प्रतिबिम्ब है ! जैसे जन्म लेती हुई कन्या माँ "शैलपुत्री" का स्वरूप है ! और जब वह कौमार्य अवस्था में पहुंच जाती है तब वह माँ "ब्रह्मचारिणी" का स्वरूप ग्रहण करती है ! फिर विवाह से पूर्व तक चंद्रमा के समान निर्मल होने से वह " माँ चंद्रघंटा" समान है! फिर नए जीव को जन्म देने के लिए गर्भ धारण करने पर वह " माँ कूष्मांडा" स्वरूप है ! और फिर संतान को जन्म देने के बाद वह स्त्री माँ "स्कन्दमाता" हो जाती है ! इसी तरह संयम व साधना को धारण करने पर वो माँ "कात्यायनी" का रूप है! और अपने संकल्प से अपने पति की अकाल मृत्यु को भी जीत लेने से वह माँ "कालरात्रि" के समान है! वैसे ही सम्पूर्ण संसार पर दया व उपकार करने से वह माँ "महागौरी" हो जाती है! अंत में धरती को छोड़कर स्वर्ग जाने से पहले संसार मे अपनी संतान को स्मस्त सुख-संपदा) का आशीर्वाद देने के कारण वह "माँ सिद्धिदात्री" हो जाती है !