Ethiclogy

नाग पंचमी का महत्व



              

हिंदू धर्म में नाग पंचमी के त्योहार का बहुत महत्व होता है। इस त्योहार को श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिवजी के आभूषण नागों की उपासना की जाती है। नागों की पूजा करके आध्यात्मिक शक्ति, सिद्धियां और अपार धन की प्राप्ति की जा सकती है। नाग पंचमी के दिन कई लोग काल सर्प दोष के लिए पूजा करवाते हैं लेकिन इसे शुभ नहीं माना जाता है। जिन लोगों को सापों के डरावने सपने आते हैं या सर्प से भय लगता है उन लोगों को भी इस दिन सांपों की पूजा करने की सलाह दी जाती है। बता दें इस दिन सिर्फ उन नागों की पूजा की जाती है जो भगवान शिवजी के आभूषण होते हैं। नागपंचमी के दिन सांपों को मारना मना होता है। सावन के महीने में विशेषकर नागपंचमी के दिन धरती खोदना निषिद्ध होता है। इस दिन व्रत भी रखा जाता है। व्रत रखने वाले को नागों को खीर और दूध पिलाने की परंपरा है।बारिश के मौसम में नाग पंचमी मनाने का एक बड़ा कारण हैं। जब के दिनों में बिलों में पानी भर जाने से सांप बाहर आ जाते हैं। वे आश्रय की खोज में रिहायशी इलाकों, सड़कों, खेतों, बाग-बगीचों और झुरमुटों में आकर छिप जाते हैं। हम सब उन्हें देख कर डर जाते हैं। लेकिन सच यह है कि मनुष्य जितना सांपों से डरता है, उतना ही वे भी मनुष्य से डरते हैं। बिना कष्ट पाए या छेडख़ानी के वे आक्रमण नहीं करते हैं। और नाग हमें नुकसान न पहुंचाएं, इस कारण से हम उनकी पूजा करके उन्हे खुश करते हैं।नागपंचमी की पूजा सुबह-सुबह की जाती है और पूजा से पहले यह जरूरी है कि व्यक्ति नित्यकर्म निपटा कर, अच्छी तरह स्नान करके स्वच्छ कपड़े धारण कर ले| पूजा के लिए ताजा-ताजा सेवई या चावल की खीर बनाई जाती है| दीवाल पर गेरू पोतकर पूजा के लिए जगह बनायीं जाती है| कच्चे दूध में कोयला घिसकर उस कोयले से सर्पों की आकृति बनायीं जाती है| अगर किसी सपेरे के पास या आसपास कहीं भी सांप हों तो सबसे पहले साँपों की बांबी में एक कटोरा दूध नागों को अर्पित किया जाता है| इसके बाद दीवाल पर बनाये हुए नागों को दही, दूर्वा, गंध, अक्षत, कुशा, फूल, जल, रोली, चावल इत्यादि अर्पित करके और पूजन करके सेवई/खीर और अन्य मिष्ठान का भोग लगाया जाता है इसके बाद कथा और आरती संपन्न करते हैं| इस दिन कई लोग व्रत भी रखते हैं| कई क्षेत्रों में नागपंचमी के दिन पिछले दिन का बनाया हुआ बासी भोजन ग्रहण करने की भी प्रथा है|